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धुंधले पड़ते रिश्ते - Blurred Relationship Day By Day

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धुंधले पडते रिश्ते:

Blurred Relationship Day By Day
Blurred Relationship

किसी कलम में इतना सामर्थ्य नही हैं जो कि "माता- पिता" जैसे शब्दो पर स्याही उकेर सकें। ये लफ्ज़ किसी परिचय के मोहताज नही हैं। शायद कायनात से भी पुराना हैं इनका वजूद । यह वह रिश्ता हैं जिसके वात्सल्य के साये में रहने के लिए भगवान भी बाल रूप में धरती पर अवतरित होते हैं।


माता -पिता बच्चों के लिए खुशियों का गुलिस्ताँ सजाते हैं। उसे लफ्ज़ो में बयां करना असंभव होगा। जाने - अनजाने में ही सही पर ये सवाल दिमाग में जरूर टकराता हैं कि हमारे माता-पिता ने अपने लिए किया ही क्या हैं ? सारी उम्मीद, सारे सपने, सारी मेहनत बच्चों की जिंदगी संवारने में लगा दी और जल्द ही यह सवाल अंदर तक सहमा देता हैं।

वक़्त बदला,हालात बदलें, दौर बदला जहाँ अब हर कुछ रफ़्तार में बदल रहा हैं तब ये रिश्ते धुँधले पड़ते जा रहे हैं।वात्सल्य के रिश्ते पर औपचारिक की एक चादर ढकी हुई सी नज़र आती हैं। जिसे हटाने का वक़्त महज कुछ त्यौहारो या विशेष अवसरों पर ही मिल पाता हैं पर इन सब में युवाओं का सोशल साईट पर बढ़ते खुमार को जिम्मेदार कहना सही नही हैं ।


💥आखिर क्यों?

क्योंकि हम भूल जाते हैं तरक्की की ख्वाहिश लिए मीलों दूर बैठी युवा संतान अपने माँ -बाप से इसी जरिए जुडे रहते है। माता -पिता भले ही हमारे विषयों के नाम ना जानते हो , बदलती दुनिया की जरूरत ना समझते हो पर वे हमे हमसे बेहतर समझते है। वे अपने बेबस सपनों की जमी पर हमारा पालना सजाते हैं ।

यहाँ यह याद रखना जरूरी है कि हम उस सरजमी की पैदाइश हैं जहाँ एक बेटा अपने पिता के वचन का सम्मान रखने के लिए चौदह वर्षों का वनवास भी सहर्ष स्वीकार कर लेता हैं। हालाँकि उन्हे खुशे रखने के लिए हमें श्रवण कुमार या सीता बनने की जरूरत नही , पर गौर फरमाने की बात है कि आज के समय में वृद्धाश्रम हमारी संस्कृति के मुँह पर एक प्रश्न चिह्न लगाता है।

आज भारत मे रिश्तों के प्रति आदर ,सम्मान , इज़्ज़त कम होती- सी प्रतीत होती हैं। ये बेहद दुर्भाग्यपूर्ण हैं।

अपना बहुमूल्य समय देने के लिए आपका ,सहृदय धन्यवाद !!!

💬 सहयोग: शिवानी त्यागी

👀नोट:  प्रिय पाठकों, आपसे विनम्र निवेदन है यदि आपको इस लेख में कही भी , कोई भी त्रुटि नजर आती है या आप कुछ सुझाव देना चाहते है, तो कृपया नीचे दिए गए टिप्पणी स्थान ( Comment Box) में अपने विचार व्यक्त कर सकते है, हम अतिशीघ्र उस पर उचित कदम उठायेंगे |


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