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वसंत पंचमी से जुड़ी कुछ रोचक बातें: Facts About Vasant Panchami

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आखिर,वसंत पंचमी मनाते क्यों हैं?

Interesting Facts About Vasant Panchami
Image Credit: amazon
भारत में कई त्यौहार बड़े उत्साह से मनाए जाते हैं जो मौसम में हो रहे परिवर्तन की सूचना भी देते हैं। बदलते मौसम की सूचना देने वाले प्रमुख त्यौहारों में से एक है "वसंत पंचमी।" इस त्यौहार को सरस्वती जयंती, सरस्वती पूजा या श्रीपूजा के नाम से भी जानते हैं। ये वसंत ऋतु के आगमन का परिचायक है। इस दौरान मौसम बहुत सुहाना होता है, न ही अधिक गर्मी होती है न अधिक ठण्ड।

वसंत पंचमी का मुहूर्त:

वसंत पंचमी की पूजा आप प्रातः काल में ही करें। पूजा 12 - 12:30 तक कर सकते हैं। इस बार कुछ लोग 29 जनवरी तो कुछ लोग 30 जनवरी को वसंत पंचमी का पर्व मनाएंगे।

वसंत पंचमी की पूजा विधि:

1. प्रातः काल उठकर स्नानादि कार्यों से निवृत्त होकर पीले रंग के स्वच्छ वस्त्र पहनें।

2. पूजा स्थान पर सफाई करके सरस्वती माता की मूर्ति को स्नान कराके सुंदर पीले कपड़े पहनाएं और तिलक लगाएं।

3. इस दिन सरस्वती माता को कमल के पुष्प अर्पित करते हुए उनकी पूजा करें।

4. खीर, मिठाई और ताजा फलों का भोग लगाएं।



5. आरती उतारकर सभी परिवारजनों में प्रसाद वितरित करें।

6. इस दिन पुस्तकें और वाद्य यंत्रों को भी पूजा स्थान पर रखकर उनकी पूजा करें।

वसंत पंचमी से जुड़ी पौराणिक कथाएं और मान्यताएं:

  • कथा 1: जब ब्रह्मा जी ने सृष्टि का निर्माण किया तो वाणी की अनुपस्थिति में उन्हें सन्नाटा अच्छा नहीं लग रहा था। पूरी सृष्टि बन गयी थी फिर भी कुछ अधूरा लग रहा था। ऐसे में उन्होंने कमंडल से जल छिड़का जिससे एक देवी प्रकट हुईं। यही देवी सरस्वती कहलाईं जिन्होंने वीणा बजाकर धरती में कंपन प्रकट किया। ऐसे ही सृष्टि में चेतना आई और वाणी का प्रवाह होता गया। इन देवी के एक हाथ में पुस्तक और एक में वीणा थी, इसीलिए यह संगीत और विद्या की देवी कहलाईं। जिस दिन यह देवी प्रकट हुईं उस दिन को सरस्वती जयंती या वसंत पंचमी के नाम से नाम से मनाया जाने लगा।
  • कथा 2: जब त्रेता युग में रावण ने देवी सीता का हरण कर लिया तब भगवान राम उन्हें ढूंढते हुए यहां वहां भटक रहे थे। चलते चलते वे दंडकारण्य पहुंचे जहां उन्हें शबरी मिली। शबरी को दर्शन देकर और उसके हाथ से झूठे बेर खाकर उसको धन्य किया। यह दिन था वसंत पंचमी का और इस दिन से इस त्यौहार का महत्त्व और अधिक बढ़ गया।

💥इसे मनाने के विविध तरीके:

1. इस ऋतु में चारों ओर हरियाली दिखाई देती है। इसीलिए किसानों में वसंत पंचमी को लेकर अलग ही उत्साह रहता है। वे भी सरस्वती माँ को नई फसल अर्पित करके धन्यवाद देते हैं।



2. गुजरात में गरबा खेलकर वसंत पंचमी मनाई जाती है। जब हर तरफ रंग-बिरंगे कपड़ों में लोग गरबा खेलते हुए माँ सरस्वती का पूजन करते हैं तो मौसम खिलखिला उठता है।

3. वसंत पंचमी के दिन दान का भी विशेष महत्व होता है। इस दिन सामर्थ्य अनुसार अन्न दान और वस्त्र दान अवश्य करें। कुछ लोग बच्चों को विद्या से संबंधित चीज़ें जैसे पेन पेंसिल, पुस्तक, कॉपी आदि। इस बार आप भी गरीब बच्चों के बीच ये चीज़ें बांटे, आपको अच्छा अनुभव होगा।

4. पंजाब जैसे राज्यों में हर चीज़ का उत्साह अलग ही स्तर का होता है। ये लोग अपने उल्लास और ऊर्जा के लिए भी जाने जाते हैं। ऐसे में इनकी वसंत पंचमी की रौनक बनती है पतंगबाज़ी। रंजीत सिंह जी द्वारा इस प्रथा का आरंभ हुआ था जिसका आज पतंगबाज़ी की प्रतियोगिता के रूप में विस्तार हो गया है।

5. बंगाल का राज्य कला प्रेमियों का राज्य है। वहां के लोग संगीत और कला के धनी हैं। इसीलिए वसंत पंचमी के दिन ये लोग वाद्य यंत्र और किताबों की पूजा के साथ नाटक और नृत्यों की प्रस्तुति भी करते हैं। कामदेव और देवी रति से वसंत पंचमी का संबंध होने के कारण बंगाल में रासलीलाओं का भी जमकर आयोजन होता है।

6. वसंत पंचमी के दिन त्रिवेणी संगम जैसे स्थलों पर शाही स्नान का भी आयोजन किया जाता है। इस दिन तीर्थ स्थानों और गंगा जैसी पवित्र नदियों में स्नान का भी विशेष महत्व होता है। उत्तर प्रदेश, बिहार और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में वसंत पंचमी के दिन विशेष मेले और रंगारंग कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं।

अपना बहुमूल्य समय देने के लिए आपका ,सहृदय धन्यवाद !!!

💬 सहयोग: अनविता कुमारी 

नोट:  प्रिय पाठकों, आपसे विनम्र निवेदन है यदि आपको इस लेख में कही भी , कोई भी त्रुटि नजर आती है या आप कुछ सुझाव देना चाहते है, तो कृपया नीचे दिए गए टिप्पणी स्थान ( Comment Box) में अपने विचार व्यक्त कर सकते है, हम अतिशीघ्र उस पर उचित कदम उठायेंगे |

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