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ज्यादा जरूरी क्या है, 24 'कैरेट' खाना या सोना ? - Story For You

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24 'कैरेट' खाना या सोना:

Which Is More Important Gold Or Food
Gold Vs Food

इस सोमवार रात मुझे मध्यप्रदेश के इंदौर शहर में पांच किलोमीटर का सफर तय करने में सवा घंटे लग गए।कार में बैठकर कुछ करने को नही था ,इसलिए मैं इंदौर की चमक का आनंद लेने लगा । सभी इमारत रंगीन बल्ब और क्रिसमस ट्री से सजी हुई थी ।

बेशक यह सब क्रिसमस और आने वाले नय साल के लिए ही था ।एक तरह  से इंदौर को अपने बड़े भाई मुम्बई की तरह ही जीना पसंद है ।मंगलवार सुबह 7 बजे नास्ते के 7 बजे नाश्ते के लिए मैं पद्मश्री अपनी से सम्मानित जनक पलटा मगिलिगन के घर गया , जिन्हें ' जनक नजर दीदी के नाम से जाना जाता है । 

उनका घर जीरो वेस्ट हाउस माना इस जाता है , जहां कुछ भी कचरे में नहीं फेंका जाता । जब मैं दीदी के गांव सनावदिया पहुंचा तो वहां कई विषयों पर बातें हुई । लेकिन मेरे लिए सबसे बँकाने वाला विषय था - उनकी खाने की आदते । 

न सिर्फ जनक दीदी , बल्कि आसपास के कुछ गांव वाले भी मेरे साथ शामिल थे , जिनमें ऑर्गनिक खेती करने वाले कुछ किसान भी थी यकीन मानिए , यह चर्चा आपको हिलाकर रख देगी । 

💥कुछ विशेष बातें:



उस क्षेत्र के ज्यादातर गांव वाले पत्ता गोभी या फूल गोभी नहीं खाते हैं , जिन्हें वे खुद बड़ी मात्रा में उगाते हैं । वे इन्हें सिर्फ शहर में बेचने के लिए उगाते हैं , जहां चमकदार सब्जियां पसंद की जाती हैं । ऐसा इसलिए क्योंकि वे किसान छह से ज्यादा प्रकार के केमिकल इन पर छिड़कते हैं और खुद यह जहर खाना नहीं चाहते हैं ।

 गोभी जितना सफेद होता है , वह उतनी ही ऊंची कीमत पर बिकता है । लेकिन इसमें कीड़ों को मारने के लिए डाला गया ढेर सारा जहर भी होता है । चूंकि हम शहरी हमेशा ठेले या मॉल से चमकदार सब्जियां खरीदते हैं , मैंने उनसे समझने की कोशिश की कि वे शरीर के लिए हानिकारक केमिकल कैसे इस्तेमाल करते हैं , जो फल और सब्जियों को चमकदार बनाते हैं । 

अगर इसमें मैं भिंडी , टमाटर और दम्मी सब्जियां जोड़ना शुरू कर दूं तो आप सब्जियां खाना बंद ही कर देंगे ! जब मैंने कृषि उत्पादों और शहरों में रहने वाले उपभोक्ताओं में ऐसे असंतुलन के हल के बारे में पूछा तो उन्होंने कहा कि छठी कक्षा से ही युवाओं की सोच बदलने की जरूरत है । 

उनसे ऑगनिकमिंग के फायदों और केमिकल के शरीर पर पड़ने वाले असर पर बात करना एक तरीका हो सकता है । 



उन्होंने ही 16 वर्षीय यशराज मंडलोई के बारे में भी बताया । यशराज ने 500 वर्गफीट की जमीन पर चार लाइनों में आलू बोए हैं जो पूरी तरह ऑर्गेनिक हैं । उसने यह चार साल के संघर्ष के बाद हासिल किया है , क्योंकि उसकी जमीन पर कई सालों तक जहरीले केमिकल पड़ते रहे थे । 

आश्चर्य की बात यह है कि मंगलवार को बादल छाए थे, मैं पूरे दिन वहां की हवा में बदबूदार केमिकल स्प्रे को महसूस कर सकता था। 

यहां तक कि उस गांव में नीम के कुछ पेड़ भी मुरझा गए हैं , जिन्हें हम दवा मानते हैं । नियमों के मुताबिक कोई भी व्यक्ति 18 वर्ष का होने के बाद ही फॉर्मिंग का बिजनेस शुरू कर सकता है । इस उम्र तक पहुंचने से पहले ही वे अपने परिवार और आसपास के लोगों से केमिकल का इस्तेमाल करने वाले तरीके सीख चुके होते हैं । 

इसलिए भले मानुस , जो जनक दीदी से भी जुड़े हुए हैं , वे बच्चों को शरीर के बाहर पहने जाने वाले ' कैरट ' ( जैसे सोने जैसी धातुओं के लिए होता है ) की बजाय शरीर के अंदर जाने वाले खाने की कैरट ( गुणवत्ता ) की परवाह करने के बारे में सिखा रहे हैं । और यशराज जैसे बच्चे इस सोच की पहली फसल हैं , जो शौकिया तौर पर अपने ही परिवार में यह भमिका निभा रहे हैं । 

उनका एक ग्रुप है जो स्कूल के बाद ऑर्गनिक फॉर्मिंग के अच्छे असर को समझते हैं । फंडा यह है कि आप किस पर ज्यादा ध्यान देना चाहते हैं - उस खाने पर जो आप खाते हैं या उन धातुओं पर जो आप पहनते हैं ? फैसला आपका है ।

अपना बहुमूल्य समय देने के लिए आपका ,सहृदय धन्यवाद !!!

💬 सहयोग: कृष्णकान्त कुर्रे 

👀नोट:  प्रिय पाठकों, आपसे विनम्र निवेदन है यदि आपको इस लेख में कही भी , कोई भी त्रुटि नजर आती है या आप कुछ सुझाव देना चाहते है, तो कृपया नीचे दिए गए टिप्पणी स्थान ( Comment Box)में अपने विचार व्यक्त कर सकते है, हम अतिशीघ्र उस पर उचित कदम उठायेंगे |

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