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International Dance Day: खुल कर नाचने दें, अपने मन के मयूरा को

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अन्तरराष्ट्रीय नृत्य दिवस:

 खुल कर नाचने दें, अपने मन के मयूरा को
International Dance Day
“देख, जिंदां से परे रंग-ए-चमन जोश-ए-बहार, रक्स करना है तो फिर पांव की जंजीर ना देख” 

1982 से 29 अप्रैल को मनाया जाने वाला इंटरनेशनल डांस डे एक बार फिर आ गया है। डांस के शौकीनों के लिए ये दिन काफी खास होता है क्योंकि इस दिन उन्हें अपना टैलेंट दिखाने का मौका मिलता है। वैसे अगर टैलेंट है तो इसके लिए किसी खास दिन का इंतजार नहीं करना होता पर इंटरनेशनल डांस डे डांस के शौकीनों को एक मंच देता है, जहां वो अपना टैलेंट दिखा सकते हैं। 

डांस हम सबके जीवन का एक अहम हिस्सा है। डांस के जरिए लोग अपनी खुशी जाहिर करते हैं। पार्टी हो, या कोई भी सेलिब्रेशन डांस के बिना अधूरा माना जाता है। जब इंसान खुश होता है तो उसके कदम खुदबखुद थिरकने लगते हैं। भले ही उसे डांस स्टेप्स ना पता हों पर अपनी खुशी जाहिर करने के लिए वो किसी भी तरह डांस करने की कोशिश जरूर करता है।


💥कब और कैसे मनाया जाता है, इंटरनेशनल डांस डे ?

इंटरनेशनल डांस डे मनाने का मकसद डांस के प्रति लोगों को जागरूक करना होता है और लोगों को ज्यादा से ज्यादा प्रेरित करना ताकि वे डांस से जुड़ सकें। डांस एक कला होने के साथ-साथ दुनिया के अलग-अलग कल्चर के बारे में बातचीत करने का एक जरिया है। 

इस दिन को मनाने के पीछे एक कारण ये भी है कि लोग अपनी राजनीतिक और भाषायी पहचान छोड़ कर नृत्य की भाषा को अपनाते हुए एक साथ जुड़े रहें। नृत्य खुद को व्यक्त करने का एक माध्यम है। लोगों को डांस के विभिन्न रूपों से रूबरू कराने के मकसद से भी इस दिन को मनाया जाता है। 


साथ ही डांस के जरिए इंसान अपनी खुशियां भी दूसरों के साथ बांटता है इसी मकसद को ध्यान में रखते हुए इस दिन को मनाया जाता है। इनमें से एक है गाला सेलिब्रेशन है, होस्ट सिटी कौन होगा? इसका चुनाव इंटरनेशनल थियेटर इंस्टीट्यूट के द्वारा किया जाता है। इंटरनेशनल डांस डे मनाने की शुरूआत इंटरनेशनल थियेटर इंस्टीट्यूट की डांस कमिटी की से तरफ किया गया था। बाद में यूनेस्को द्वारा इसे अपनाया लिया गया।

हर साल चुना जाता है, एक प्रतिनिधि: 

इंटरनेशनल थियेटर इंस्टीट्यूट के एक्जीक्यूटिव काउंसिल और डांस कमिटी के द्वारा हर साल एक क्रोरियोग्राफर को चुना जाता है जो पूरी दुनिया में डांस से संबंधित संदेश देता है। इस साल डांस कमिटी की तरफ से साउथ अफ्रीका के ग्रेगरी मैकोमा को चुना गया है। 


29 अप्रैल को ही क्यों मनाया जाता डांस डे ?

इस दिन को मनाने के लिए 29 अप्रैल का दिन इसलिए चुना गया क्योंकि इसी दिन फ्रेंच के महान डांस आर्सिस्ट जीन जॉर्जस नोवेरे का जन्म हुआ था। वे एक फ्रेंच डांसर और बैले मास्टर भी थे। इस दिन दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में विभिन्न तरह के आयोजनों के साथ-साथ स्ट्रीट शो, एक्जीबिशन वगैरह का आयोजन किया जाता है। इस दिन के सेलिब्रेशन के लिए दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में इवेंट्स आदि का आयोजन किया जाता है। 

फिट रखता है, डांस:

यूं तो डांस के अभिव्यक्ति का एक माध्यम माना जाता है पर इसके अलावा डांस करने के कई और फायदे हैं, जिन्हें जानने के बाद आप भी डांस को अपने जीवनशैली का हिस्सा बनाना चाहेंगे। 

तेजी से मोटापे का शिकार होती दुनिया को फिट रखने में भी डांस एक अहम किरदार निभा सकता है। 
नियमित रूप से डांस करने से मांसपेशियां मजबूत होती हैं। 
वजन कम होता है। 
आत्मविश्वास बढ़ता है। 
एकाग्रता बढ़ती है। 
थकान और आलस दूर होता है। 
तनाव से मुक्ति मिलती है।

भारत में डांस परम्परा:

भारत में डांस का क्रेज हमेशा से ही रहा है। अभी हाल में टिकटॉक पर देखें तो जो औरतें घूंघट में रहा करती थीं वे भी डांस के जरिए अपना टैलेंट दिखा रही हैं। हालांकि भारत में भी सदियों से नृत्य के जरिए कल्चर को प्रस्तुत करने की परंपरा रही है आइए जानते है, भारत में डांस के विभिन्न रूप - 

ओडिसी:
क्लासिकल नृत्य का हिस्सा माना जाने वाले नृत्य के इस रूप में विभिन्न तरह की मुद्राएं यानी एक्सप्रेशन के जरिए कहानी कहने की कला है नृत्य का ये रूप। इसकी शुरुआत ओडिसा के विभिन्न मंदिरों में हुई थी। 

भारतनाट्यम:
तमिलनाडू से शुरू हुआ नृत्य के इस रूप का प्रदर्शन दुनिया के हर कोने तक पहुंच चुका है। कला का ये रूप सदियों से चला आ रहा है। 

ताण्डव:
पौराणिक कथाओं में इस नृत्य का खास महत्व है। इस नृत्य का संबंध भगवान शिव से माना जाता है। इसे विभिन्न तरीके से दर्शाया गया है। 

कुचीपुड़ी:
ये क्लासिकल डांस का ही एक रूप है। इसकी शुरूआत आंध्रप्रदेश से हुई। 

कथक:
इसमें कोई शक नहीं है कि नृत्य का ये रूप भारतीय नृत्य के सबसे ग्लैमरस नृत्य माना जाता है। इस नृत्य का संबंध बनारस, लखनऊ, जयपुर आदि से माना जाता है। 

कथकली:
भारत के दक्कन क्षेत्र से शुरू हुआ ये नृत्य स्टेज परफॉर्मेंस के लिए सबसे अच्छा माना जाता है। इसे नृत्य को सबसे मुश्किल माना जाता है।  

मौजूदा लॉकडाउन को देखते हुए इस दिन को होने वाले कुछ आयोजन को 25 जून तक टाल दिया गया है। 


अपना बहुमूल्य समय देने के लिए आपका ,सहृदय धन्यवाद !!!

💬 सहयोग: नबीला शागुफ़ी 

नोट:  प्रिय पाठकों, आपसे विनम्र निवेदन है यदि आपको इस लेख में कही भी , कोई भी त्रुटि नजर आती है या आप कुछ सुझाव देना चाहते है, तो कृपया नीचे दिए गए टिप्पणी स्थान ( Comment Box) में अपने विचार व्यक्त कर सकते है, हम अतिशीघ्र उस पर उचित कदम उठायेंगे । 

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